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अयोध्या नगरी में पंचकल्याण के तहत धार्मिक उत्सव के साथ तप कल्याण दिवस मनाया गया।

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अयोध्या नगरी में पंचकल्याण के तहत धार्मिक उत्सव के साथ तप कल्याण दिवस मनाया गया।

बिना आत्म नियंत्रण से आप अहम और वहम से दूर नहीं रह पाओगे, ,,मुनि श्री आदित्य सागर,,

मंगलवार को धार्मिक अनुष्ठान में विधायक, महापौर, कलेक्टर, डीआईजी भी पहुंचे।

खंडवा। हम खंडवा में जब से आए हैं जीवन को उत्सव बनाने की चर्चा चल रही है,केवल सुन लेने से काम नहीं होता,उसे गुनना जरूरी है,धर्म सभा में आना पड़ा है तो व्यर्थ है, आए हो तो ही सार्थक होगा।,आत्म नियंत्रण जिसके पास है उनके जीवन मे उत्सव,महोत्सव है,जिसके पास आत्म नियंत्रण होगा वह कभी दुखी नहीं होता हमेशा सुखी रहता है, यह उधर पंचकल्याणक के चौथे दिन तप महोत्सव दिवस को संबोधित करते हुए मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। मुनि श्री ने कहा कि अपने जीवन को सफल बनाने के लिए नाभीराय राजा के पुत्र आदि कुमार ने भी संसार की धन संपत्ति छोड़कर तप करते हुए कल्याण का मार्ग अपनाया। जीवन की सबसे ज्यादा समस्या आत्म नियंत्रण के कंट्रोल की कमी से होता है,आत्म नियंत्रण आ गया तो काम बन गया और चला गया तो काम बिगड़ जाता है,जीवन का हर क्षण आत्म नियंत्रण के साथ होना चाहिए,नियंत्रण जैसे बिगड़ता है सब काम बिगड़ जाता है, मुनि श्री ने कहा कि जो बिक जाए वह इंसान नहीं, गुरु भक्ति से जिंदगी बनती है, आप में श्रद्धा और भक्ति है तो गुरु पैसे कौ नही देखते हैं,बिना आत्म नियंत्रण से आप वहम एवं अहम से दूर नही रह पाओगे,जितना भी कमा लो काम में आने वाला नहीं है, और धन आपने धर्म मे लगा दिया तो सार्थक हो जाओगे,अपने जीवन को उत्सव बनाना है तो (सेल्फ कंट्रोल)आत्म नियंत्रण की और आना है पंचकल्याणक का यह चरण (चौथा दिन) भगवान के जीवन की सबसे बड़ी घटना है, जो सामान्य मनुष्यों को भी वैराग्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया
की तीन दिनों खंडवा में जैन धर्म का बड़ा धार्मिक अनुष्ठान पंचकल्याणक महोत्सव अयोध्या नगरी तापड़िया गार्डन में चल रहा है। बड़ी संख्या में समाचार उपस्थित होकर इस महोत्सव का लाभ प्राप्त कर रहे है। पंचकल्याण महोत्सव के चौथे दिन पंचकल्याणक में तप कल्याणक (दीक्षा कल्याणक) बनाया गया यह पावन अवसर है जब तीर्थंकर सांसारिक सुखों का त्याग कर वैराग्य के मार्ग पर बढ़ते हैं और आत्मशुद्धि के लिए तपस्या करते हैं। यह महोत्सव मोह-माया को छोड़कर संयम धारण करने, आत्मा की शक्ति को पहचानने और कर्मों के निर्जरा का संदेश देता है, जो मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करता है मुझ पर मंच पर बुनियादी मुनि आदित्य सागर जी महाराज के ससंध सानिध्य में विधानाचार्य पीयूष जी जैन भैया जी द्वारा तप और दीक्षा की क्रियाएं करवाई गई। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जब आदि कुमार ने धन दौलत अपने बेटो को बांटकर वन की ओर निकल चले, जब आदि कुमार वन की ओर गमन कर रहे थे तो इंद्र इंद्राणी एवं हजारों की संख्या में श्रावकों के आंखों में आंसू थे। यह क्षण तीर्थंकर की भोग-विलास से योग (आध्यात्मिक साधना) की ओर यात्रा को दर्शाता है।तप कल्याणक के दौरान तीर्थंकरों द्वारा राज-पाट छोड़कर मुनि दीक्षा लेने का दृश्यांकन शानदार तरीके से अयोध्या नगरी में किया गया। जो भक्तों में वैराग्य की भावना जाग्रत करता हे। समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु जैन पंकज सेठी ने बताया कि मंगलवार को धार्मिक अनुष्ठान में महापौर अमृता अमर यादव विधायक कंचन मुकेश तनवे, जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता, डीआईजी मनोज राय, भाजपा के जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, धर्मेंद्र बजाज, कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी मल्लू राठौर ने पहुंच कर मुनि श्री को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में उपस्थित होकर पुण्य प्राप्त किया। समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाड़िया, सचिव सुनील जैन, कोषाध्यक्ष पवन रावका, राजेंद्र छाबड़ा, सुरेश लोहाडिया, वीरेंद्र जैन द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत अभिनंदन कर धार्मिक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप जैन द्वारा किया गया एवं आभार सचिव सुनील जैन कैलाश पहाड़िया ने माना।

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